mokshada ekadashi vrat katha in hindi मोक्षदा एकादशी 2024 व्रत तिथि महत्व और पूजा विधि

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mokshada ekadashi vrat katha in hindi :- हिन्दू धर्म के मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। मान्यता है की इस दिन व्रत रखने से इतना पुण्य प्राप्त होता है की हमारे पूर्वजों के पाप भी धूल जाते हैं और उन्हे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी के व्रत में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करके mokshada ekadashi vrat katha सुनी जाती है।

मोक्षदा का अर्थ क्या है?

मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की मोक्षदा एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और भक्ति से करने से जातक को इतने पुण्य की प्राप्ति होती है की मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मोक्षदा एकादशी कब है 2024 में

मोक्षदा एकादशी 2023 की अंतिम एकादशी है। यह 11 दिसम्बर 2024 को बुधवार के दिन है। हिन्दू पंचाग के मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में मोक्षदा एकादशी आएगी।

तिथि आरंभ :- 11 दिसंबर 2024 को सुबह 03:42 बजे

तिथि समाप्त :-12 दिसंबर 2024 को सुबह 01:09 बजे

पारण का समय ( व्रत खोलने का समय ) :- 12 दिसंबर को सुबह 06:28 बजे से सुबह 08:47 बजे तक

mokshada ekadashi vrat katha

mokshada ekadashi vrat katha :- प्राचीन काल में गोकुल नाम की एक सुन्दर और खुशहाल नगरी थी। उस नगरी में वैखानस नाम का एक विद्वान राजा शासन करता था। वैखानस वेद पुराणों का ज्ञाता और ज्ञान का पुजारी था। उसके राज्य में बहुत बड़े बड़े विद्वान ऋषि-मुनि, ब्राह्मण आदि निवास करते थे।

एक रात्री को राजा वैखानस जब सो रहे थे तो उन्होंने बहुत ही बुरा स्वपन देखा। राजा ने देखा की उनके पूज्य पिता नरक लोक में कष्ट काट रहे हैं। नरक लोक की यातनाएं सहते हुवे उनके पिता उनसे मुक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। नींद से जागने के बाद राजा वैखानस बहुत व्यथित हो गए । अपने पूज्य पिताजी को नरक में यातनाएं सहते देखकर वो रातभर सो नहीं पाए।

अगली सुबह राजा ने अपने सभी विद्वान ऋषि मुनियों और पंडितों को राजमहल में बुलाया और अपना स्वप्न बताया। वैखानस का स्वप्न सुनकर सभी विद्वान गण सोच में पड़ गए । काफी सोचने विचारने के बाद भी जब वे राजा के स्वपन का सारांश नहीं निकाल पाए तो वो बोले ” हे राजन ! आपके परम पूजनीय पिताजी आपको स्वप्न में प्रकट होकर क्या संकेत देना चाहते हैं इसे जानने में हम असमर्थ हैं। लेकिन गोकुल नगरी के निकट ही वन में परम ज्ञानी ऋषि पर्वत का आश्रम है। वो जरूर इस समस्या का हल निकाल देंगे ।” ऋषियों की बात सुनकर राजा वैखानस तुरंत वन की तरफ निकल पड़े। ऋषि पर्वत के आश्रम में जाकर राजा ने उन्हे प्रणाम किया।

ऋषि पर्वत ने कठिन तपस्या करके परम ज्ञान की प्राप्ति कर रखी थी। वैखानस को देखकर वो सारा व्रतांत समझ गए और राजा को बैठने के लिए कहा। राजा वैखानस के कुछ बोलने से ही पहले ऋषि पर्वत बोले ” हे राजन ! हमनें तुम्हारी विद्वता के चर्चे पूरी नगरी में सुने हैं। तुम्हारे महल में हर विद्वान ऋषि-मुनि और पंडित के लिए स्थान है। हम तुम्हें प्रणाम करते हैं। हमें तुम्हारी व्यथा बिना बताए ही ज्ञात हो गई है। मैं अवश्य तुम्हारी सहायता करूंगा। “

राजा वैखानस ऋषि पर्वत की बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुवे और बोले ” गुरुदेव ! मैंने आज तक अपनी प्रजा के साथ अन्याय नहीं किया और हमेशा धर्म का सात्विक मार्ग अपनाया है । मेरे जीवन में सभी सुख और आनंद हैं लेकिन जब से मेरे पूज्य पिता को नरक में यातनाएं भोगते देखा है मन कुंठा से भर गया है। ” जाने अनजाने में मुझसे ऐसा कौनसा अनैतिक कार्य हो गया जिससे मेरे पिता को नरक में स्थान मिला । “

राजा वैखानस की बात सुनकर ऋषि पर्वत बोले ” पुत्र, तुम्हारे पिता को नरक में स्थान अपने ही कर्मों के कारण मिला हैं। तुम्हारे पिता ने युवावस्था में काम-वासना में आकर अपनी पत्नियों से अनैतिक आचरण किया। एक पत्नी के वशीभूत होकर उन्होंने अपना पतिधर्म निभाया लेकिन उसी पत्नी के कहने पर दूसरी पत्नी से पति धर्म न निभाकर घोर पाप किया। इसी पाप ने तुम्हारे पिता को नरक में स्थान दिलाया और घोर यातनाएं सहने को विवश किया। “

ऋषि पर्वत की बात सुनकर राजा वैखानस का मन और व्यथित हो उठा और वो बोले ” हे ऋषिवर मैं आपके तेज और इस परम ज्ञान को सत सत नमन करता हूँ। आपके इस ज्ञान के दर्शन करके मैं धन्य हो गया। गुरुदेव एक विनती हैं की मुझे मेरे पूजनीय पिता की मुक्ति का मार्ग बताए। एक पुत्र होने के नाते ,उन्होंने जो पाप किया है उसका मैं प्रायश्चित करूँगा। कृपया मुझे मार्ग दिखाएं । “

ऋषि पर्वत बड़ी विनम्रता से बोले ” राजन ! सारी एकादशी में केवल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के व्रत में ही इतना पुण्य है की वह तुम्हारे पिता को नरक से मुक्ति दिलाकर मोक्ष दिला सकती है। तुम पूर्ण विधि विधान से मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को व्रत करो और उसके बाद mokshada ekadashi vrat katha सुनो । एकादशी को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान पुण्य करो। तो तुम्हें अपार पुण्य की प्राप्ति होगी। लेकिन तुम्हें इस पुण्य को अपने पिता को समर्पित करने का संकल्प लेना होगा तभी वो नरक से मुक्ति प्राप्त कर सकेंगे। “

ऋषि पर्वत की बात सुनकर राजा ने उसी समय पूर्ण विधि विधान से मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लिया और ऋषि पर्वत को प्रणाम करके अपने महल में लौट आए।

मार्गशीर्ष माह में ऋषि पर्वत के कहे अनुसार राजा ने पूर्ण विधि विधान से शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखा। पूरी नगरी में गरीबों में खूब दान किया, भोजन कराया और वस्त्र वितरित किए। राजा वैखानस ने ऋषि के कहे अनुसार अपने व्रत का फल अपने पिता को समर्पित किया।

राजा वैखानस के व्रत से उन्हे खूब पुण्य प्राप्त हुआ और उनके पिता को नरक से मुक्ति मिली और वो मोक्ष को प्राप्त हुवे । उसी समय से ही मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी मोक्षदा एकादशी के नाम से जानी जाती है। और माना जाता है की मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से हमारे पूर्वजों को मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

mokshada ekadashi vrat katha pdf

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा pdf में डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए लिंक पर click करें।

मोक्षदा एकादशी का व्रत कैसे करें?

मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से पहले एकादशी व्रत के नियम जान लेना बहुत जरूरी है।

  • एकादशी का व्रत 24 घंटे का होता है। एकादशी की तिथि के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक व्रत रखा जाता है। दशमी की दोपहर को भोजन किया जाता है इसके बाद दशमी की शाम को भोजन नहीं किया जाता , एकादशी को भोजन नहीं किया जाता । द्वादशी को व्रत का पारण करने के बाद भोजन किया जाता है।
  • व्रत को खोलना, व्रत का पारण करना कहा जाता है। व्रत का पारण द्वादशी की तिथि को पारण के मुहूर्त पर ही करना चाहिए।
  • इस तरह 2024 में 11 दिसम्बर को आरंभ करें और 12 दिसम्बर को पारण के मुहूर्त प्रातः 06:28 बजे से प्रातः 08:47 बजे के बीच ही खोलें।

मोक्षदा एकादशी की पूजा विधि

  • व्रत संकल्प :- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि दैनिक क्रियाओं से निवृत होकर साफ और स्वच्छ कपड़े पहने। इसके पश्चात भगवान विष्णु की मूर्ति के आगे जाकर दाहिने हाथ में जल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प आप अपने अनुसार साधारण शब्दों में ले सकते हैं।
  • भगवान विष्णु की पूजा :- इसके बाद भगवान विष्णु की षडोपचार से पूजा करें। उन्हे फूल, ऋतुफल, तुलसी, नवैध, इत्र आदि अर्पित करें। धूप दीपक दिखाएं और उनकी आरती करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण की पूजा :- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा की जाती है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण की भी पूर्ण विधि विधान से पूजा करें।
  • एकादशी की दिनचर्या :- एकादशी के व्रत के दिन सात्विक दिनचर्या का पालन करें। किसी की चुगली,झगड़ा आदि से बचे। पूरे दिन मन में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का जाप करते रहें। दिन में फलाहार का सेवन करें।

मोक्षदा एकादशी का क्या महत्व है?

  • मोक्षदा एकादशी पितरदोष दूर करने वाली एकादशी मानी जाती है। ऐसा माना जाता है की अगर हम मोक्षदा एकादशी का व्रत रखते हैं तो हमारे पूर्वज जो अभी मुक्ति नहीं पा सके हैं उनको भी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। मोक्षदा एकादशी के महत्व को इस बात से भी समझा जा सकता है की इस एकादशी का पुण्य बाकी सारी एकादशी के संयुक्त पुण्य के बराबर माना जाता है।
  • महाभारत में वर्णित है की इस दिन महाभारत के युद्ध में पांडव अर्जुन अपने कर्तव्य से भ्रमित हो गए थे इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन अर्जुन को गीता के उपदेश दिए थे। इसलिए मोक्षदा एकादशी का दिन गीता जयंती के रूप में भी पूरे भारत में मनाया जाता है।
  • इस दिन भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण दोनों की पूजा की जाती है। इसलिए इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है।
  • पूरे भारत में इस एकादशी को हर्षो उल्लास से मनाया जाता है भले ही वह उतर भारत हो या दक्षिण। दक्षिण भारत में इस एकादशी को वैकुंठ एकादशी के नाम से मनाया जाता है।
  • साल की अंतिम एकादशी होने के कारण भी इसका महत्व अपने आप में विशेष हो जाता है।

FAQ’s

मोक्षदा एकादशी कितने बजे से कितने बजे तक है?

मोक्षदा एकादशी 2024 में 11 दिसंबर 2024 को प्रातः 03:42 बजे से 12 दिसंबर 2024 को प्रातः 01:09 बजे तक है।

एकादशी का व्रत कौन रख सकता है?

एकादशी का व्रत स्त्री, पुरुष या बच्चे कोई भी रख सकता है।

mokshada ekadashi vrat katha wishes

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मोक्षदा एकादशी शुभकामनाएं images

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