ekadashi vrat ke niyam in hindi एकादशी व्रत के 21 नियम

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एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जाता है। लेकिन इस व्रत को करने से पहले ekadashi vrat ke niyam जानना बहुत जरूरी हैं। किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता हैं जब उसे नियमपूर्वक पूरे विधि विधान से किया जाए। जब आप एकादशी का व्रत रखते हैं तो यह जानना बहुत जरूरी है की व्रत में भोजन कैसा हो, भोजन कब करें, भगवान विष्णु के साथ किन किन देवताओं की पूजा करें, एकादशी पूजा का समय क्या है, कैसे वस्त्र पहने इत्यादि । तो आइए जानते हैं एकादशी के दिन हमें क्या करना चाहिए?

ekadashi vrat ka mahatva in hindi एकादशी व्रत का महत्व क्या है

ऐसा माना जाता है की जो व्यक्ति एकादशी के दिन उपवास रखता और भगवान विष्णु की आराधना करना उसके सारे पाप मुक्त हो जाते थे। इसलिए इस तिथि तो माधव तिथि भी कहते हैं। इसलिए एकादशी की तिथि स्वयं भगवान विष्णु से उत्पन्न हुई है और भगवान के प्रति भक्ति को उजागर करती है।

एकादशी की तिथि को वेद पुराणों में अत्यंत पवित्र और भगवान विष्णु का प्रिय दिन बताया है। पद्म पुराण के अनुसार भगवान ने संसार में सभी पापियों को दंड देने के लिए पाप पुरुष की रचना की। जो भी व्यक्ति अधर्म के मार्ग पर चलता उसे उसके पापों के अनुसार पाप पुरुष दंड देता। लेकिन दयावान भगवान अपने भक्तों को एक मौका और देना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने ही शरीर से एकादशी की रचना की ।

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एकादशी व्रत कब से प्रारंभ करना चाहिए

एकादशी का व्रत 2 तरह से किया जाता है। पहला जिसे नित्य व्रत कहते हैं। इस व्रत में आप भगवान विष्णु के चरणों में खुद को समर्पित कर देते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। लेकिन इस व्रत के बदले में आप भगवान विष्णु से किसी भी मनोकामना या सांसारिक सुख की इच्छा नहीं करते हैं। आपका उद्देश्य केवल भगवान की भक्ति होता है। नित्य एकादशी व्रत आप कभी भी शुरू कर सकते हैं। इसको शुरू करने के कोई नियम नहीं हैं।

दूसरा व्रत जिसे काम्य व्रत कहते हैं। इस एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की भक्ति करके उनसे आपके सांसारिक कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं या आप कोई अन्य मनोकामना भगवान विष्णु से मांगते हैं। इस प्रकार के एकादशी व्रत को हमेशा उत्पन्ना एकादशी ( मार्गशीर्ष माह ) से आरंभ करना चाहिए। ऐसा माना जाता है की उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता का जन्म हुआ था। एकादशी का व्रत मल मास , पौष मास और भाद्रपद मास में शुरू नहीं करना चाहिए।

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एकादशी व्रत के नियम ekadashi vrat ke niyam in hindi

एकादशी व्रत को करने से पहले जातक को यह जानना बहुत जरूरी है की एकादशी के व्रत में किन किन नियमों का पालन करना चाहिए। विधि पूर्वक नियमों में बंधा व्रत करने से भी उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। कभी कभी अज्ञानता के कारण जातक ऐसे कार्य कर लेता है तो एकादशी व्रत में बिल्कुल वर्जित हैं। इसलिए आइए जानते हैं एकादशी के दिन हमें क्या करना चाहिए?

एकादशी के दिन हमें क्या करना चाहिए?

  • उपवास का पालन करें :- एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक भोजन का त्याग करके व्रत का पालन करें। अगर आप शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं तो पूरा व्रत फलाहार पर कर सकते हैं अन्यथा शाम को भगवान विष्णु की पूजा करके एक समय भोजन कर सकते हैं।
  • सुबह जल्दी उठे :- एकादशी के दिन कभी भी देर तक नहीं सोना चाहिए। एकादशी को सूर्योदय से पहले उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • पीले वस्त्र धारण करें :- एकादशी को भगवान विष्णु के प्रिय पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
  • रात्री जागरण करें :- एकादशी व्रत करने वाले जातक को व्रत से पहले यानि दशमी को रात्री जागरण का पालन करना चाहिए और भगवान विष्णु की आराधना करते हुवे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करना चाहिए।
  • दान पुण्य जरूर करें :- एकड़सी के दिन दान पुण्य का विशेष महत्व होता है। एकादशी को ब्राह्मण या किसी जरूरतमन्द को भोजन आदि कराएं और अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा दें।
  • सात्विक भोजन करें :- एकादशी व्रत में अगर आप एक समय भोजन करते हैं तो सात्विक भोजन करना चाहिए। ज्यादा तला भुन्ना और मसालेदार भोजन नहीं करना चाहिए।

एकादशी में क्या क्या नहीं करना चाहिए?

  • द्वादशी से ही खाने में रखने विशेष ध्यान :- एकादशी से एक दिन पहले यानि द्वादशी की तिथि से ही लहसून, अदरक, प्याज, माँस, मदिरा और मसूर की दाल आदि तामसिक चीजों का सेवन बंद कर दे। तामसिक चीजे उन्हे कहते हैं जो हमारे शरीर में उत्तेजना लाती है जो आगे चलकर क्रोध का कारण बनता है।
  • लकड़ी की दातुन का प्रयोग न करें :- एकादशी को जातक को लकड़ी की दातुन से दांत साफ नहीं करना चाहिए। मुंह साफ करने के लिए नीम, जामुन आम आदि के पत्ते चबा सकते हैं और उंगली से दांत साफ कर सकते हैं। चूंकि इस दिन पेड़ के पत्ते भी नहीं तोड़ने चाहिए इसलिए नीचे गिरे पत्ते ही चबाएं।
  • चावल का सेवन ना करें :- एकादशी की तिथि को चावल का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। एकादशी को चावल नहीं खाने की मान्यता ऋषि मेधा और माँ शक्ति से जुड़ी है। ऋषि मेधा माँ शक्ति का प्रकोप झेल ना सके और स्वेच्छा से अपने नश्वर शरीर को एकादशी के दिन त्याग दिया। माना जाता है की शरीर त्यागने के बाद वो धरती माँ में समा गये और उनका पुनर्जन्म चावल और जौ के पौधे के रूप में हुआ। चूंकि ऋषि मेधा एकादशी के दिन धरती माता मे समाए थे और चावल के रूप में पुनः प्रकट हुए थे इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है।
  • एकादशी व्रत में दिन में नहीं सोए :- अगर आप एकादशी व्रत रखते हैं तो इस बात का ध्यान रखें की एकादशी की तिथि को आप दिन में सोये नहीं। आराम करने के लिए लेट सकते हैं लेकिन दिन में नींद लेना वर्जित माना गया है। ऐसा माना जाता है एक बार नींद लेने के बाद व्रत का संकल्प टूट जाता है। इसलिए अगर गलती से आप दिन में सो भी जाते हैं तो उठकर दुबारा नहाकर व्रत का संकल्प लें।
  • झाड़ू ना लगाएं :- एकादशी व्रत में झाड़ू लगाना भी वर्जित माना गया है। मान्यता है की झाड़ू लगाने से छोटे जीवों जैसे चींटी और अन्य कीड़ों की मृत्यु हो सकती है। इसलिए एकादशी के दिन ऐसे पाप से बचने के लिए घर में झाड़ू ना लगाएं।
  • बाल ना कटवाएं :- हमारे प्राचीन ग्रंथों में एकादशी के दिन बाल कटवाना भी वर्जित माना गया है।
  • एकादशी को जुबान पर रखें काबू :- एकादशी के दिन कभी भी गुस्सा नहीं करना चाहिए और ना ही किसी को कटोर और गली गलोच भले वचन बोलने चाहिए। एकादशी के दिन मधुर वाणी का प्रयोग करें और किसी की निंदा चुगली ना करें। एकादशी को झूठ बोलने से भी बचना चाहिए।
  • स्त्री प्रसंग और भोग विलास से बचे :- एकादशी के व्रत में स्त्री पुरुष को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी को पूरे दिन सात्विक और ब्रह्मचर्य का पालन करने से परम फल की प्राप्ति होती है।
  • काले वस्त्र ना पहने :- एकादशी व्रत में जातक को पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। पीला रंग भगवान विष्णु को अति प्रिय है। एकादशी को काले रंग के वस्त्र कभी नहीं पहनने चाहिए।
  • तुलसी माता को स्पर्श ना करें :- एकादशी के दिन तुलसी को जल चढ़ाना और स्पर्श करना वर्जित माना गया है। मान्यता है की एकादशी के दिन माता तुलसी भी उपवास में रहती हैं।
  • पेड़ की पते ना तोड़े :- एकादशी व्रत में जातक को किसी भी पेड़ के पत्ते आदि नहीं तोड़ने चाहिए। अगर आपको किसी पेड़ पत्ते का उपयोग है तो नीचे गिरे पत्ते उपयोग में ले सकते हैं। एकादशी पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें।
  • किसी के द्वारा दिए अन्न का सेवन ना करें :– एकादशी व्रत में जातक को कभी भी किसी दूसरे द्वारा दिए अन्न और फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन घर पर बनी वस्तुओं का ही सेवन करें।
  • पान का सेवन ना करें :- एकादशी के दिन पान का सेवन वर्जित माना गया है। ऐसा माना जाता है की पान खाने से व्यक्ति में काम क्रीडा की प्रवर्ति बढ़ती है।

एकादशी व्रत का भोजन ekadashi vrat mein kya khana chahie

एकादशी व्रत में खाने में विशेष ध्यान रखना होता है। एकादशी व्रत आप पूरे दिन फलाहार पर भी कर सकते हैं और एक समय भोजन करके भी कर सकते हैं। याद रहें उपवास के दिन भर पेट कुछ ना खाएं वरना उपवास का अर्थ ही खत्म हो जाता है। तो आइए जानते हैं एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए

एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए

  • फल :- कोई भी व्रत फलाहार पर करें तो सर्वोतम माना जाता हैं। इसके अलावा एक समय भोजन कर रहें हैं तो दिन में फल जैसे आम, सेव, संतरा, पपीता या अन्य कोई मौसमी फल कहा सकते हैं। फलों का juice भी आप एकादशी व्रत में ले सकते हैं।
  • दूध चाय दही आदि पेय पदार्थ :- एकादशी व्रत में आप दिन में चाय कॉफी दूध आदि पी सकते हैं। इसके अलावा दही, लस्सी और नारियल पानी आदि का सेवन भी कर सकते हैं। इससे आपके शरीर में पानी की पूर्ति होगी और व्रत के लिए आवश्यक ऊर्जा भी मिलती रहेगी।
  • साबूदाना/मखाने :- एकादशी को दिन में 1 बार साबूदाने की खिचड़ी, मखाने, मूंगफली के दाने आदि ले सकते हैं।

एकादशी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए

एकादशी व्रत में निम्न चीजों का सेवन निषेध बताया गया है।

  • मसूर की दाल
  • अदरक, प्याज, लहसून आदि तामसिक भोजन ।
  • माँस मदिरा का सेवन भूलकर भी ना करें।
  • गाजर, शलजम, गोभी, पालक और मूली आदि सब्जी का सेवन भी एकादशी को नहीं किया जाता है।
  • सफेद नमक भी यथासंभव एकादशी में सेवन ना करें। अगर किसी स्वास्थ्य कारण से नमक खाना अनिवार्य है तो सेंधा नमक उपयोग लें।

एकादशी व्रत सामग्री list

एकादशी व्रत की पूजा करने से पहले हमें यह जानना भी बहुत जरूरी है की एकादशी पूजा में क्या क्या सामान लगता है? चूंकि एकादशी व्रत मने भगवान विष्णु को पूजा जाता है इसलिए अगर आप बृहस्पतिवार का व्रत भी करते हैं तो लगभग वही सामान इस पूजा में भी लगता है।

  • मूर्ति :- भगवान विष्णु और गणेश जी की मूर्ति या फोटो जो भी उपलब्ध हो। चूंकि एकादशी को भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है इसलिए ऐसी फोटो लें जिसमें भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी भी हों।
  • पूजा सामग्री :- पीला या लाल कपड़ा, लकड़ी की चौकी, पीला चंदन, मौली, अक्षत, इत्र, धूप, दीपक, अगरबती, नैवेध, पंचमेवा, तुलसी, पान, लौंग, सुपारी, पानी का कलश, दूर्वा घास, आम के पत्ते, ऋतुफल और नारियल।
  • पुष्प :- भगवान गणेश के लिए लाल रंग के पुष्प और भगवान विष्णु के लिए पीले रंग के पुष्प।
  • दान दक्षिणा :- माना जाता है की अगर हमारी पूजा में कोई कमी रह जाती है तो दक्षिणा हमारी उस कमी को पूरी करती है। इसलिए श्रद्धानुसार थोड़े पैसे भी पूजा की थाली में अवश्य रख लें।

एकादशी के दिन पूजा कैसे करते हैं – एकादशी व्रत पूजा विधि

एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा का प्रावधान है। भगवान विष्णु के माता लक्ष्मी की पूजा भी एकादशी को की जाती है। एकादशी की पूजा शाम को की जाती है। पूजा अर्चना करने के बाद जातक भोजन गृहण कर सकता है।

  • दशमी तिथि को भोजन का रखें ध्यान :- अगर आप एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं तो दशमी की तिथि से ही तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, अदरक, माँस और मदिरा आदि का सेवन बिल्कुल ना करें।
  • एकादशी सुबह की शुरुवात :- एकादशी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके पीले कपड़े पहन लें। पीला रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग है इसलिए एकादशी को पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है।
  • चौकी की स्थापना :- घर की पवित्र और साफ कौने को पूजा स्थल के लिए चुने। पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछा दें।
  • आचमन जरूर करें :- अगर गंगाजल है तो बहुत अच्छा वरना घर के शुद्ध जल को लेकर आचमन करें। आचमन के लिए चल हमेशा तांबे के पात्र में लें। पात्र से अपने हाथ में थोड़ा जल लेकर आँखें बंद करके भगवान नारायरण, अपने इष्ट देवताओ को याद करें। ऐसा 3 बार करें। आचमन करते समय भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ केशवाय नम: ॐ नाराणाय नम: ॐ माधवाय नम:” बोलते रहें। आचमन करते समय उतना ही जल लिया जाता है जिससे केवल गला गीला हो जाए। अब पूरी पूजा सामग्री पर भीजल के छींटे दे। अंत में खुद पर जल के छींटे देकर पवित्र करें।  
  • श्री हरी मूर्ति स्थापना :- चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो की स्थापना करें। चूंकि भगवान गणेश सबसे पहले पूजनीय हैं इसलिए भगवान गणेश की भी मूर्ति या फोटो स्थापित करें। भगवान की मूर्ति के दाहिने और कलश की स्थापना करें। पहले थोड़े चावल डालकर कलश को आसन्न दे फिर कलश उनके ऊपर रखें। कलश पर पान के पत्ते रखकर उस पर नारियल रखें।
  • पूजा विधि :- पूजा में सबसे पहले घी का दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और गौरी पुत्र गणेश को धूप, दीपक और अगरबती दिखाए। गणेश जी को मौली, जनेऊ आदि अर्पित करें। भगवान विष्णु को पीले चंदन का टीका लगाएं। उन्हे पीले फूल भेंट करें। इसके बाद बाकी पूजा का सामान जैसे ऋतुफल, नैवेध, तुलसी, इत्र, पान, लौंग, सुपारी, अक्षत, पंचमेवा आदि अर्पित करें। पुत्रदा एकादशी को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है।
  • आरती :- पूजा के बाद भगवान गणेश की आरती करें और उसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें।
  • भोग :- आरती करने के बाद भगवान को भोग लगाएं। भोग में आपने जो भी मिठाई जैसे खीर, हलवा आदि बनाया है उसका भोग लगा सकते हैं और वही प्रसाद के रूप में भी उपयोग करें। गुड और चने की दाल का भोग भी आप लगा सकते हैं। माना जाता है की भगवान विष्णु का भोग तुलसी के बिना अधूरा माना जाता है। इसलिए एकादशी के भोग में तुलसी दाल अवश्य शामिल करें।
  • रात्री जागरण :- एकादशी की रात को आप भगवान विष्णु के भजन कीर्तन करें और जागरण करें तो बहुत उत्तम माना जाता है।
  • द्वादशी को दान :- द्वादशी के दिन आप अपनी श्रद्धानुसार ब्राह्मण भोज कराएं और गरीब बचों में कपड़े, अनाज , गुड़, घी आदि का दान करें। माना जाता है की पुत्रदा द्वादशी को दान करने भगवान विष्णु जल्दी आपकी याचना सुनते हैं और आपकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

निष्कर्ष / सारांश

प्रिय पाठकों ekadashi vrat ke niyam in hindi के माध्यम से हमने यह जाना की एकादशी के दिन हमें भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए क्या क्या करना चाहिए। साथ ही हमने यह भी जाना की एकादशी में क्या क्या नहीं करना चाहिए? अगर एकादशी व्रत से जुड़े आपके कोई और भी सवाल हैं तो comment में लिख कर जरूर बताएं।

FAQs

एकादशी व्रत कब से प्रारंभ करना चाहिए

एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह में आने वाली उत्पन्ना एकादशी से शुरू करना चाहिए। ऐसी मान्यता है की इसी दिन माता एकादशी का जन्म हुआ था।

यह भी पढ़ें :- उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा।

एकादशी व्रत किसको करना चाहिए

एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत स्त्री, पुरुष, बच्चा और वृद्ध कोई भी कर सकता है। भगवान विष्णु की स्तुति करने के किसी कोई मनाही नहीं है। लेकिन जो भी इस व्रत को रखता है उसे एकादशी से संबंधित सारे नियमों का पालन करना चाहिए तभी व्रत का फल प्राप्त होता है।

एकादशी व्रत कितने करने चाहिए

हिन्दू पंचाग के अनुसार वर्ष में 24 एकादशी की तिथि आती है। अगर वर्ष में अधिकमास हो तो 26 एकादशी की तिथि आती है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। वैसे तो हर एकादशी का व्रत बहुत प्रभावशाली और कल्याणकारी प्रभाव वाला होता है लेकिन निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन माना गया है। अगर आप सभी 24/26 व्रत करने में सक्षम हैं तो जरूर करें वरना केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके भी आप भगवान विष्णु और मत लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

Quora :- एकादशी व्रत का महत्व और नियम

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