अपने स्थान का पूरे महीने का राहू काल का समय जानिए aaj ka rahu kaal 2024

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ज्योतिष शास्त्र में राहू काल को दिन का सबसे अशुभ समय माना जाता है। कोई भी कार्य शुरू करने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है की aaj ka rahu kaal का समय क्या है। प्रत्येक स्थान के लिए राहूकाल का समय थोड़ा अलग होता है। क्यूंकी हर जगह सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर ही राहूकाल का निर्धारण किया जाता है। राहूकाल हर दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कभी हो सकता है।

ऐसा माना जाता है इस समय राहू गृह की सीधी नजर पृथ्वी लोक पर पड़ती है और जिस पर भी राहू की नजर पढ़ जाए उसका बुरा समय आरंभ हो जाता है। इसलिए हिन्दू धर्म में कोई भी शुभ कार्य राहूकाल में नहीं किया जाता है। अगर आप भी किसी स्थान का राहूकाल का समय जानना चाहते हैं तो नीचे search box में उस स्थान का नाम डालें। अगर आप अपने वर्तमान स्थान का राहूकाल समय जानना चाहते हैं तो “Use Current Location” बटन पर click करने के बाद location permission दें।

अपने स्थान का पूरे महीने का राहू काल का समय जानिए aaj ka rahu kaal

अपने शहर का नाम डाले

आज का राहू काल का समय

दिनांक
स्थान
राहू काल
से
सूर्योदय
सूर्यास्त

पूरे महीने का राहू काल का समय

अगर आप इस महीने कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं और पूरे महीने का राहूकाल का समय जानना चाहते हैं तो नीचे दी गई सारणी में आपके द्वारा चुने गए स्थान का पूरे महीने का राहूकाल का समय दर्शाया गया है। उसके आधार पर आप पूरे महीने के शुभ कार्यों का समायोजन ऐसे कर सकते हैं की कोई भी शुभ कार्य राहूकाल में ना करना पड़े।

तारीख राहू काल समय
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यह भी पढे :- आज का ब्रह्म मुहूर्त का समय 2024.

राहुकाल निकालने की विधि

राहूकाल और चौघड़िया मुहूर्त निकालने की विधि लगभग समान सी है। किसी भी स्थान का राहूकाल पता करने के लिए सबसे पहले हमें वहाँ के सूर्योदय और सूर्यास्त का पता होना चाहिए। उसके बाद नीचे दी गई राहुकाल निकालने की विधि से राहूकाल का समय निकाल सकते हैं।

  • दिन की अवधि :- सबसे पहले हमने आज के दिन की अवधि निकालनी होती है। मान लीजिए आज सूर्योदय सुबह 07:10 AM और सूर्यास्त शाम को 06:10 PM पर है। यानि आज के दिन की अवधि 11 घंटे या 660 मिनट की है।
  • दिन के समान अंतराल के 8 भाग :- दिन की समयावधि निकालने के बाद अब दिन को समान समय अंतराल में 8 भागों में बांटो। यानि 660/8 = 82.5 या 83 मिनट। यानि दिन 83 मिनट के 8 बराबर भागों में बंट गया।
  • राहूकाल गणना :- सप्ताह के सातों दिनों यानि रविवार से शनिवार तक हर दिन राहूकाल कौनसे भाग में आएगा यह निश्चित होता है।
    • सोमवार :- दिन का दूसरा भाग राहूकाल होता है।
    • मंगलवार :- दिन का सातवाँ भाग राहूकाल होता है।
    • बुधवार :- दिन का पाँचवाँ भाग राहूकाल होता है।
    • गुरुवार :- दिन का छठा भाग राहूकाल होता है।
    • शुक्रवार :- दिन का चौथा भाग राहूकाल होता है।
    • शनिवार :- दिन का तीसरा भाग राहूकाल होता है।
    • रविवार :- दिन का आठवा भाग राहूकाल होता है।
  • दिन का पहला भाग कभी भी राहूकाल नहीं होता है।
  • ऊपर दिए उदाहरण के अनुसार यदि आज का दिन सोमवार है तो आज का राहूकाल दिन का दूसरा भाग यानि सूर्योदय के 83 मिनट बाद से शुरू होगा और 83 मिनट बाद खत्म होता। यानि राहूकाल 7:10 से 83 मिनट बाद यानि 8:33 से शुरू होकर 9:56 बजे तक होगा। इसी तरह आप बाकी दिनों का भी निकाल सकते हैं। अगर दिन को पूरा 12 घंटे का माने तो राहूकाल 1 घंटा 30 मिनट का होता है।

यह भी पढे :- जानिए किसी भी स्थान का आज का चौघड़िया मुहूर्त ।

rahu kaal chart in hindi
rahu kaal chart in hindi

राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए

ज्योतिष शास्त्र में अनुसार राहूकाल को दिन का सबसे अशुभ समय माना जाता है। इसलिए हर दिन जब दिन में राहूकाल आता है तो हमें निम्न कार्य नहीं करने चाहिए। ऐसा माना जाता है की अगर दिन के बाकी समय की तुलना में राहूकाल में अगर आपको सफल होना है तो आपको अत्यधिक प्रयत्न करने पड़ते हैं चाहे वह कार्य कितना भी सरल हो। तो आइए जानते है की राहुकाल में वर्जित कार्य कौन कौन से हैं ।

  • नए कार्य का आरंभ :- चूंकि राहूकाल को अशुभ माना जाता है इसलिए हमें राहूकाल के समय कभी भी कोई शुभ कार्य की शुरुवात नहीं करनी चाहिए। माना जाता है की राहुकाल में आरंभ किया कार्य सफल होने की बहुत कम संभावना होती है।
  • यज्ञ हवन आदि कार्य :- राहूकाल के दौरान सनातन धर्म में पवित्र कार्य जैसे हवन और यज्ञ नहीं किए जाते हैं। इसलिए जब भी आपको कोई हवन आदि करना हो तो इस बात का विशेष ध्यान रखें की उस दौरान राहूकाल ना हो। मान्यता है की अगर राहूकाल के दौरान हवन आदि किया जाता है तो उसका पूर्ण फल हमें कभी प्राप्त नहीं होता है।
  • शादी विवाह आदि शुभ कार्य :- सनातन धर्म में दिन के राहूकाल के समय शादी, सगाई, गृह प्रवेश आदि मंगल कार्य कभी नहीं किए जाते हैं। इसीलिए सनातन धर्म में यह परंपरा है की कोई भी मंगल कार्य करने से पहले किसी विधान पंडित से मुहूर्त निकलवाया जाता है। इस मुहूर्त में राहूकाल का समय विशेषरूप से देखा जाता है।
  • यात्रा करना :- अगर आपको कोई विशेष और महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए यात्रा करनी है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें की वह यात्रा आप राहूकाल के समय ना करें। अगर ऐसा संभव नहीं है तो कम से कम इतना जरूर ध्यान रखें की यात्रा की शुरुवात राहूकाल के दौरान ना हो। ज्योतिष के अनुसार राहूकाल के दौरान यात्रा करने से आपके कार्य के सिद्ध होने की संभावना कम हो जाती है।
  • कीमती वस्तुओं का क्रय विक्रय :- राहुकाल के दौरान सोना, चांदी, आभूषण, महंगे मोबाईल, जमीन, property आदि कीमती वस्तुओं को खरीदने या बेचने से बचना चाहिए। राहूकाल के दौरान कीमती वस्तुओं का क्रय विक्रय करने से आपको नुकसान होने की संभवना रहती है।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

राहु काल का मतलब क्या होता है।

राहूकाल का मतलब है दिन का ऐसा समय जब राहू गृह की सीधी और अशुभ नजर धरती पर पड़ती है। माना जाता है की इस समय जिस पर भी राहू की नजर पड़ती है उसका विनाश होने लगता है और उसके जीवन में नकारात्मकता आने लगती है।

यह भी पढे :- मासिक शिवरात्रि 2024 का हिन्दी कैलंडर ।

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